ग़ज़ा में इज़राइली सेना द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को योजनाबद्ध तरीके से तबाह करना ‘मेडिसाइड’ (यानी मेडिकल सिस्टम का सुनियोजित विनाश) है। संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने बुधवार को इज़राइल पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, पैरामेडिक स्टाफ और अस्पतालों पर हमला कर रहा है और उन्हें भुखमरी में धकेल रहा है, ताकि ग़ज़ा में इलाज की पूरी व्यवस्था ख़त्म हो जाए।
संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदकों का बयान
स्वास्थ्य के अधिकार पर विशेष प्रतिवेदक त्लालेंग मोफोकेंग और 1967 से कब्जे वाले फ़लस्तीनी क्षेत्रों में मानवाधिकार की स्थिति पर विशेष प्रतिवेदक फ्रांसेस्का अल्बानीज़ ने कहा —
“हम इंसान और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ होने के नाते ग़ज़ा में हो रहे युद्ध अपराधों पर चुप नहीं रह सकते। हम एक चल रहे नरसंहार के गवाह हैं, और इसके साथ-साथ ‘मेडिसाइड’ के भी, जो फ़लस्तीनियों को नष्ट करने की सुनियोजित प्रक्रिया का हिस्सा है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि ग़ज़ा में स्वास्थ्य प्रणाली पर निरंतर हमले और अपार्थाइड व्यवस्था के चलते वहां बची-खुची सुविधाएं भी खत्म हो रही हैं।
स्वास्थ्यकर्मियों पर अत्याचार और भुखमरी
विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े कर्मचारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, हिरासत में लिया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है और अब उन्हें बाकी आबादी की तरह भुखमरी में रखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्वास्थ्यकर्मी भूख और कुपोषण के कारण बेहोश हो गए हैं। यह न केवल उनके अपने स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की देखभाल और इलाज की क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों पर अत्याचार और भुखमरी
विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़े कर्मचारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, हिरासत में लिया जा रहा है, प्रताड़ित किया जा रहा है और अब उन्हें बाकी आबादी की तरह भुखमरी में रखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्वास्थ्यकर्मी भूख और कुपोषण के कारण बेहोश हो गए हैं। यह न केवल उनके अपने स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों की देखभाल और इलाज की क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 से 11 जून 2025 के बीच ग़ज़ा में स्वास्थ्य सेवाओं पर 735 हमले हुए। इन हमलों में 917 लोगों की मौत हुई, 1411 घायल हुए, 125 स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित हुए और 34 अस्पतालों को नुकसान पहुंचा।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन
विशेषज्ञों ने कहा, “स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पतालों पर जानबूझकर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की चुप्पी एक साफ़ संदेश देती है कि ग़ज़ा के लोगों की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है।
तत्काल युद्धविराम और ज़िम्मेदारी तय करने की मांग
संयुक्त राष्ट्र के इन अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि ग़ज़ा में जारी कत्लेआम को खत्म किया जाए, लोगों को उनके अपने घरों में बिना डर के जीने का हक़ दिया जाए और स्थायी कब्जे व अपार्थाइड से मुक्त किया जाए।
उन्होंने कहा “दुनिया के देशों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकामी दिखाई है और ग़ज़ा में फंसे फ़लस्तीनी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। युद्धविराम अब होना चाहिए, ताकि इज़राइल को उसके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जा सके।”