केरल के रहने वाले अशरफ़ की मौत से जुड़े मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। अप्रैल महीने में हिंदू दक्षिणपंथी समूह के कुछ लोगों द्वारा कथित लिंचिंग के शिकार हुए अशरफ़ की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अशरफ़ के शरीर पर 35 बाहरी चोटों के निशान थे और उनकी मौत कई गंभीर चोटों के चलते हुई थी।
कैसे हुआ था हमला?
यह घटना कुदुपु, मंगलुरु के पास एक क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान हुई। आरोप है कि अशरफ़ पर “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” नारा लगाने का इल्ज़ाम लगाया गया और इसके बाद भीड़ ने उन्हें बेरहमी से पीटा। शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को “अप्राकृतिक मौत” करार दिया और कहा कि अशरफ़ नशे की हालत में गिरने से मरे हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या मिला?
15 जुलाई को पूरी हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अशरफ़ की मौत कई चोटों और अंदरूनी खून बहने के कारण हुई। रिपोर्ट में लिखा है कि “सारी चोटें ताज़ा थीं, जीवित अवस्था में लगीं और कुंद वस्तु से मारी गईं।फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. के.एस. रश्मि ने पुष्टि की कि चोटें उन वस्तुओं से मेल खाती हैं जिनसे हमला हुआ था।
अशरफ़ के शरीर पर –
- पीठ पर बड़े-बड़े नीले निशान,
- आंखों के पास सूजन,
- चेहरे पर कट के घाव,
- जांघों और नितंबों पर डंडों के निशान,
- सिर, हाथ-पैर और प्राइवेट पार्ट पर गहरी चोटें थीं, जिससे अत्यधिक खून बहा और शॉक में मौत हो गई।
हमले में किसका नाम आया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले का नेतृत्व रविंद्र नायक नामक व्यक्ति ने किया, जो बीजेपी की नगरसेविका संगीता नायक का पति है। आरोप है कि भीड़ ने क्रिकेट बैट और लकड़ी के डंडों से अशरफ़ को तब तक मारा, जब तक वह गिर नहीं गए।
फर्ज़ी नारे का बहाना?
मानवाधिकार संगठनों और तथ्य-खोजी रिपोर्ट “लॉस्ट फ्रेटर्निटी: ए मॉब लिंचिंग इन ब्रॉड डेलाइट” ने दावा किया है कि अशरफ़ ने कोई नारा नहीं लगाया था। “पाकिस्तान ज़िंदाबाद” का आरोप झूठा कहानी गढ़ने और हमले को जायज़ ठहराने के लिए फैलाया गया। रिपोर्ट ने पुलिस पर भी सवाल उठाए कि उन्होंने घटना के बाद भी हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की। यह मामला एक बार फिर भारत में मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक नफ़रत और पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अशरफ़ के परिवार और मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख़्त सज़ा दी जाए।