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जोमैटो का नया नियम: 4 किलोमीटर से दूर खाना मंगाने पर अब ज़्यादा पैसे लगेंगे

भारत में ई-कॉमर्स, ओटीटी और फूड डिलीवरी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का एक आम चलन रहा है। शुरुआत में ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए फ्री सर्विस दी जाती हैं, फिर धीरे-धीरे मामूली सा चार्ज किया जाता है, और आखिर में लगभग हर चीज के लिए पैसे वसूले जाते हैं। अब तो आलम ये है कि कभी भी कोई नया चार्ज लगा दिया जाता है।

जोमैटो का नया ‘लंबी दूरी सेवा शुल्क’

फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने अब एक और नया चार्ज ऐड कर दिया है, जिसे ‘लंबी दूरी सेवा शुल्क’ कहा जा रहा है। यह उन ऑर्डर्स पर लगाया जाएगा जो रेस्टोरेंट से 4 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर डिलीवर किए जाएंगे। यह चार्ज तय नहीं है, बल्कि डिलीवरी की दूरी के मुताबिक अलग-अलग होगा।

पहले से मौजूद दूसरे चार्ज

जोमैटो पहले से ही अपने यूजर्स से प्लेटफॉर्म फीस और सर्ज प्राइसिंग जैसे चार्ज लेता है। सर्ज प्राइसिंग तब लागू होती है जब डिमांड ज्याद होती है, जैसे कि लंच या डिनर के टाइम पर। अब इस नए ‘लंबी दूरी सेवा शुल्क’ के जुड़ने से ग्राहकों पर और इकनॉमिक बोझ पड़ेगा।

दूरी के आधार पर चार्ज 

अगर कोई कस्टुमर किसी ऐसे रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर करता है जो उसके पते से 4 किलोमीटर से ज्यादा दूर है, तो उसे सभी चार्जेस के साथ 15 रुपये ज्यादा देने होंगे। अगर दूरी 6 किलोमीटर या उससे अधिक है, तो यह एक्स्ट्रा चार्ज 25 से 35 रुपये तक हो सकता है।

रेस्टोरेंट से कमीशन बढ़ाने की योजना

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जोमैटो अपने से जुड़े रेस्टोरेंट से मिलने वाले कमीशन को भी 30 फीसदी तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। कुछ रेस्टोरेंट मालिकों का तो यह भी कहना है कि यह कमीशन 45 फीसदी तक बढ़ सकता है।

मुफ्त डिलीवरी का दौर समाप्त

गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी से पहले, जोमैटो समेत कई फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म 4-5 किलोमीटर के दायरे में मुफ्त डिलीवरी देते थे। महामारी के बाद इसे बढ़ाकर 15 किलोमीटर कर दिया गया था। लेकिन अब यह है कि नजदीक की दुकान से भी कुछ मंगवाने पर ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।

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